उमंग
तितलियों से रंग चुराके चल दु मैं कही,,,
फूलों से खुशबू चुराके चल दु मैं कही.....
आसमान का नीला चादर ओढ़े खोजाऊं कही,,,
चाँद कि चाँदनी लिए गुम होजाऊं मैं कही.....
पक्षीयों सी उड़ती फिरूं,, नमानु कोई सीमा या शरहद.....
लहरों सी उमंग लाऊं,, नजानु कोई घाट या पनघट….
काश ऐसा हो कभी,, कोई जादू जैसे मैं बन जायुं,,,
जिसको भी छूलूं,, होठों मे उसके मुश्कान मैं भर जायुं…

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