ये दुनिया
ढ़लति हुई शाम कि पिघलते हुए आश्मान को देखा है.....
गरजती हुई बादल में चमकता हुआ बिजली को भी देखा है....
देखा है हवाओं को अपनी रुख़ बदल देना....
देखा है चाँद को बादलों में छुप जाना....
देखा अनजानो को अपनों में बदल जाना…
तो कभी, अपनों को अनजान कि तरहा पेश आना…
ज़िन्दगी ने भी हमे बहुत कुछ दिखा दिया ,,,
दर्द में क्येसे मुस्कुराना होगा, ये बात हमे शिखला दिआ.…

2 comments:
sabdon me bhav ke smundar muskura rahen hain,kash majhi ki sadayen manjil tak pahunch pati.www.skyfansclub.blogspot.com
manjil avi dur sahi, per safar hamari jari hai...
shukriya ye humrahi, aapki soch hume Kabul hai..
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